| श्रींची आरती | रत्नाकर अनिल |
| गर्दीतले.. | सतीश वाघमारे |
| मोबाईल | सन्विद |
| याचक | यशवंत जोशी |
| अवेळ होती | कमलेश पाटील |
| हा सोहळा कशासाठी? | अनुबंध |
| देहाला चाळुन घेता | सुजीत फाटक |
| रात्र | मिलिंद फणसे |
| कडुलिंब | पराग जोगळेकर |
| शुष्क शब्द | रत्नाकर अनिल |
| ~ गुढीपाडवा ~ | क्षणाचा सोबती |
| करा साजरे वनवास काही... | कबीर गिरीश |
| उपरा | गंगाधरसुत |
| असुया धरतो वारा | गंगाधर मुटे |
| स्वयंवर पृथ्वीचे | रत्नाकर अनिल |
| ऋतुंची ऐकली कुजबूज मी | बेफ़िकीर |
| आयुष्यात रचेन एक कविता | बेफ़िकीर |
| धुयमाती | विजय देशमुख |
| काय झालेय माहित नाही मी बदलायचे ठरवलय | राहुल भोसले |
| पहाटेच्या चांदण्यात... | श्रुती मानकर |
| भ्रमिष्ट | अजब |
| कै. सुरेश भट- श्रद्धांजली | मानस६ |
| पडेल पाऊस एक दिवस | रत्नाकर अनिल |
| सामान | मुग्धा रिसबूड |
| तू ...! | मिलन टोपकर |
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