| कोकिळेची पिल्ले | श्रीकांत धुं. जोशी |
| उलटून गेले वय | रन्गबावरी |
| तरंग | कामिनी केंभावी |
| अन्यथा... | अश्विन कागले |
| प्रदेश | पेशवा |
| वर्ष २००९ | मंदार मोडक |
| उगवले वर्ष नवे (नववे), क्षितीजाकडे! | क्षणाचा सोबती |
| ते दिवस | मानसी |
| मन किती चंचल असतं... | जयदेव२८ |
| ... खूप बोलायचे! | प्रदीप कुलकर्णी |
| गाणेच मौन झाले ! | चैतन्य दीक्षित |
| भिंतींनो | विक्षिप्त |
| दिवस असे श्रावणासारखे . . | धनुर्धर |
| पिंपळ | कौतुक शिरोडकर |
| परक्यांकडे डोळे ना लावुनी पहावे | नेत्रपल्लवी |
| तू अलगद मिठीत घेतोस | सनिल पांगे |
| अनंतता.... | मनिष भाटे २००८ |
| विव्हळतं तळ... | श्वास स्वातीचा |
| अंदाज तारखांचा चुकला जरा असावा | खोडसाळ |
| प्रियतमा! | खोडसाळ |
| संभ्रमा! | प्रदीप कुलकर्णी |
| 'अजब' स्वतःशी.. | अजब |
| आई | सुवर्णमयी |
| थेंब एक असा बरसून गेला.. | श्वास स्वातीचा |
| संदर्भ | चैतन्य दीक्षित |
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