| कविता | उपरा |
| कविता | होत्या कैक त्याने व्यथा साहलेल्या |
| कविता | तात, सांगा, सांग आई |
| कविता | (....... पुन्हा पुन्हा! ) |
| कविता | आता आपलं सरकार आलंय, सगळं होणार |
| कविता | चॉइस |
| कविता | आलो कुठून? - विडंबन |
| कविता | उधाणाच्या मिषाने तू किती द्वाडे बहरलेली |
| कविता | असा हा सुंदर मातोश्री बंगला |
| कविता | "विसरशील खास मला_वर्ज़न २.०" अर्थात "ट्विटरशीलही न मला" |
| कविता | विडंबनास माझ्या, वेदांत मानिले मी |
| कविता | सरकारी दर्पोक्ती / जनतेची टर्पोक्ती |
| कविता | मुलाखतीतुन तुझ्या प्रकटती |
| कविता | कविता न कराव्या... |
| कविता | पूर्वीगत पण आता काही करवत नाही |
| कविता | (मोकळे असू द्या) |
| कविता | "खा खा रे प्रियकरा" |
| कविता | उगवत्या प्रियकरा(विडंबन-मावळत्या दिनकरा-भा. रा. तांबे) |
| कविता | या सदनिकेत माझ्या |
| कविता | गमक-२ |
| कविता | (गमक) |
| कविता | नाचतेस घरी तु जेव्हा..... |
| कविता | (शेवट) |
| कविता | तांदळाची ह्या घरा चाहूल जेव्हा लागली |
| कविता | मनातल्या मनात मी.. |
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